बीजापुर में हिंदू समाज का भव्य एकदिवसीय सम्मेलन संपन्न, सनातन संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

बीजापुर। बीजापुर स्थित सांस्कृतिक मैदान में गुरुवार को हिंदू समाज द्वारा आयोजित भव्य एकदिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना तथा धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाना रहा। इस आयोजन में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन, संत-महात्मा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत मंडली टीम द्वारा भजन-कीर्तन से हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात संत-महात्माओं के सान्निध्य में पूजा-पाठ एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के साथ सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।सम्मेलन में छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों ने नृत्य, नाट्य और गीतों के माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और नैतिक मूल्यों को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।


वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता, समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित है। आज के समय में अपनी जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। धर्म और संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवनशैली का अभिन्न अंग हैं। वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों से आपसी भेदभाव भुलाकर एकजुट रहने, संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
संत-महात्माओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन संस्कृति सहिष्णुता, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यदि समाज इन मूल्यों को अपनाए, तो सामाजिक समरसता और राष्ट्र की मजबूती स्वतः सुनिश्चित होगी। उन्होंने युवाओं से नशा, हिंसा और गलत प्रवृत्तियों से दूर रहकर सेवा, संस्कार और संस्कृति के मार्ग पर आगे बढ़ने की अपील की।
सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से सनातन संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक परंपराओं के संवर्धन और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सम्मेलन में सहयोग देने वाले सभी समाजजनों, संत-महात्माओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर यह विश्वास जताया गया कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा मिलेगी।

और पढ़ें

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें